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भारत लेखन हिन्दुस्तानी हिन्दी

आइये भारत को समृद्ध करें !!!

“किसी भी युद्ध में, पृथक-पृथक मोर्चों पर कुशलतम योद्धाओं को भी एक-एक कर लड़ने भेजने पर केवल वीरगति ही दिलाई जा सकती है…. विजयश्री का वरण नहीं किया जा सकता! विजय पाने कुशल / अकुशल योद्धाओं की टुकड़ी को, योजनाबद्ध तरीके से साथ मिलकर एक के बाद एक मोर्चे पर संगठित आक्रमण करना होता है”
विचार करें ….  आपको हमको सब हिन्दी जनों को सोचना है… तय हमें करना है कि हम अलग-अलग प्रयासों को मरते देखना चाहते हैं…,  जिसमें किसी को किसी लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होनी है …., या एक दूसरे का हाथ पकड़ साथ चलकर,  हिन्दी को और हिन्दुस्तानी भाषाओं को सशक्त करने में योगदान करना है!….

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हिंदी रत्न Uncategorized

ज़िद है जिद

   जिद है जिद….. दोस्तो: हम हिन्दी हमारी संस्कृति के प्रति इतने कृतघ्न हो चुके हैं कि हम हमारे  संस्कारों के उपहास में स्वयं भी ना केवल सम्मिलित ही हैं वरन अपने ही उपहास पर अट्टहास किए जा रहे हैं!!!!!! . वे जो षणयंत्रकारियों के चंगुल में असहायता-वश जा फँसे हैं या अविवेक-वश उन्हें भी […]

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चिन्तन, चिन्ता और दुःस्वप्न! 

हममें से ऐसा कोई भी नहीं है जिसका चिन्तन, चिन्ता और दुःस्वप्न से सामना ना हुआ हो! किन्तु दुःखद यह है कि इन तीनों में उचित भेद करने में अधिकांश अक्षम हैं!

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फ़तह

कौन कहता है•••  है फ़तह बहुत मुश्किल?  कर मशक्कत माकूल  और    करता रह मुसलसल••• हो जायेगी नामुमकिन  दिखती भी हासिल हो खड़ी दूर कितनी भी,  फिक्र नहीं करना •••  बस रखना मुकद्दस,  तू सदा अपनी मंजिल!  -सत्यार्चन   

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गुनाह!

गुनाह!  मानवता को पीट-पीट कर  मारा जा रहा था••• वो मानव था करने लगा बीच बचाव, उसका क्या गुनाह  उसे क्यों मिलती नहीं पनाह  चीखता नहीं है वो पर रुकती नहीं कराह••• उसके अंदर जीवित हैं  संवेदनायें  बस यही उसका गुनाह! 

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सुख चाहिये? ये लीजिए! -9

सुख चाहिये? ये लीजिए! -9  *हम अपने स्वयं के  सबसे अच्छे मित्र और सबसे बड़े शत्रु होते हैं क्योंकि हमको हमसे ज्यादा कोई और नहीं जानता ना ही जान सकता और केवल हम ही हममें कोई परिवर्तन कर सकते हैं••• कोई दूसरा नहीं! * -हम अपने आपके बिषय में अकसर अनेक उद्घोष करते रहते हैं! जैसे- मुझसे […]

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दोगले 

:- दोगले -:  शाम का अंधेरा घिर रहा था, पंछियों के साथ- साथ थके माँदे मेहनती लोग भी घर लौट रहे थे, शहर की बिजली  जो ईमानदारी की तरह कभी भी गायब होते रहती थी। इस समय भी गायब ही थी, गया ईमान कब लौटे •••• लौटे या ना भी लौटे••• कौन जाने! मैं भी […]

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तत्व दर्शन! 

<तत्व दर्शन!>

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आइये ब्लाॅगर… स्वागत है आपका!

आइये ब्लाॅगर… स्वागत है आपका! पूर्व घोषणा अनुसार आपका अपना ब्लाॅग “लेखन हिन्दुस्तानी” बिजनेस ब्लाॅग में परिवर्तित होकर अब समूह ब्लाॅग हो गया है! “लेखन हिंदुस्तानी” को आप; अपनी रचनाओं से सुसज्जित, आपके निजी ब्लाॅग के नि:शुल्क विज्ञापन हेतु उपयोग कर सकते हैं! आपका स्वागत है- (1) आपकी सर्वोत्तम रचना के साथ आपकी ब्लाॅग लिंक्स […]

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वर्तमान आरक्षण व्यवस्था सरकारी मोटराइज्ड व्हीलचेयर है!

वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में; चलने में कमजोर आरक्षितों को मोटराइज्ड व्हीलचेयर पर बिठाकर नैसर्गिक सक्षम लोगों के साथ चलाने, बढ़ाने, दौड़ाने जैसा मूर्खता पूर्ण व आभासी प्रयास किया जा रहा है!

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सुख चाहिये? ये लीजिये! – 8

बनावटी युग में जीते हुये हम बनावटी होते गये! सच तो यह है कि जिन छोटी छोटी चीजों में / बातों में हम खुश हो सकते हैं उनमें सम्मिलित होना ही हम ओछापन /स्तरहीनता मानने लगे ! अगर इसे समझना है तो यूँ करें कि अपने आसपास के लोगों के दिखावटीपन और शर्मसार होने के […]

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सुख चाहिये? ये लीजिये!-7- सत चिंतन…

सुख चाहिये? ये लीजिये!-7- सत चिंतन… ईश्वर को समझना है तो आत्मा को समझें … बिल्कुल राष्ट्र को समझने के लिये नागरिक को समझना की तरह … किसी भी राष्ट्र की इकाई उसके नागरिक हैं … इसीलिये मैं कहता हूँ “मैं भारत हूँ” किन्तु केवल मैं ही भारत नहीं हूँ वरन् मैं भी भारत हूँ […]

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