अलग, अनर्गल, असंगत

अलग अंदाज!
अलग एहसास!
अलग व्यवहार !
अलग प्राथमिकता!
अलग आध्यात्मिकता!
अलग आस्था !
अलग आराध्य!
अलग आस!
अलग विश्वास!
है आपका•••• सबकी ही तरह आपको भी अपनी पसंद के चयन का अधिकार है किन्तु 2 महत्वपूर्ण तथ्य ध्यानाकर्षण योग्य हैं-
1- अलग होना अलग बात है किन्तु यह अलग अनर्गल, असंगत, अव्यवहारिक या असामयिक यानी कुल मिलाकर अनुचित हो; तो कितना सम्माननीय होगा या होना चाहिये ?
2- आपकी ही तरह अन्य की को उसकी पसंद के चयन की स्वतंत्रता है तो
यदि किसी 1 का प्रेम/ पसंद/ आस्था ‘आम के पेड़’ में है वह उसे ही पूजता है, 2 की ‘इमली के पेड़’ में
3 की ‘जामुन’ में और 4 की ‘महुए’ में
तो 1 को 2,3,4 के आराध्य के अपमान से क्या प्राप्ति हो सकेगी? फिर भी द्वेषवश अधिकांश 1 मौके बेमौके
या आते जाते ‘इमली’, ‘जामुन’, महुए को गरियाते, लतियाते, उनका मखौल उड़ाते मिल जाते हैं!
पहले यह बीमारी केवल 1 के कुनबे में पाई जाती थी•••  अब ऐसे ही वायरस 2, 3, 4••• n के कुटुम्बों में भी बहुतायत में दिखने लगे हैं•••• इलाज कराने कोई तैयार नहीं ••• परिणाम क्या होगा ?

कुछ ही सालों में •••• आज का यह दुराग्रह जनित द्वेष कल दुस्साहस को इतना आक्रोशित कर चुका होगा कि कल की दुनियां में सब एक दूसरे के पेड़ काट चुके होंगे••• तब ना आम बचेगा ना इमली ना जामुन ना महुआ और ना बाकी के कोई पेड़••• और पेड़ों के बाद कुनबे कुटुम्ब सब भी मर खप चुके होंगे •••!

दुनियां होगी लाशों से भरी ••• चील-गिद्ध कहकहे लगाते भोज कर रहे होंगे!

अट्टहास कर रहे होंगे !

– सुबुद्ध सत्यार्चन

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan