Menu

आइये अफवाहें फैलायें••• (अ)धर्म निभायें!

आइये अफवाहें फैलायें••• (अ)धर्म निभायें! 

🅾 आज का सुबुद्ध संदेश 💯

आपको-हमको सभी को आये दिन अग्रेषित संदेश मिलते रहते हैं! ज्यादातर ज्ञान वितरण के••• जो उपयोगी भी हो सकते हैं! किन्तु अनेक सनसनीखेज संदेश भी आते हैं••• तुरंत आगे बढ़ाने के अनुरोध सहित!

           अब यह तो हम पर ही है कि हम आँख मूँदकर मनगढ़ंत अफवाहों को अग्रेषित कर देश में उथल-पुथल मचाने में सहयोगी हों! या आँख खोलकर अग्रेषम से पहले पुष्टि कर लें! 

सामान्यतः ये संदेश इस तरह के होते हैं-

1- किसी अंजान की मदद करनेे  के लिए फोटो/ वीडियो व मोबाइल नं सहित/ रहित!
(एक मुम्बई से पूणे के लिये यात्रा रत 17 बर्षीय बच्ची का मदद की गुहार वाला सीट नं, कोच नं, ट्रेन नं, मोबाइल नंबर सहित  “एक ही संदेश” 1 साल तक अलग अलग सम्पर्कों से अग्रेषित होकर आता रहा••• पहली बार यह संदेश मिलते ही फोन लगाया तो समझ आ गया कि वो भावुक लोगों की भावनाओं से खेलने वालों का फ्राड है! हमने  पुष्टि की और फिर किसी अन्य  को अग्रेषित नहीं किया! एक और मेसेज 6-7 वर्षीय बच्चे की गम्भीर बीमारी के इलाज मेंं मदद के नाम पर दिल्ली यूनिवर्सिटी केे बच्चों का आने वाले संदेश, फोनकाल आदि…

2-  फोटो / वीडियो के साथ  बच्ची / बच्चा मिला है / गुमा है का संदेश भी बहुत आता है मगर

*कोई सुराग मिलने पर किसे /कहाँ सूचना देनी है संदेश में नहीं होता आप ही बताइए ऐसे संदेश को अग्रेषित करने का क्या लाभ होगा?*

3- आपके अपनों को  आने वाली आपदा से बचाने के लिए! अनेक संदेश आपके धर्म पर मँडराते (तथाकथित) खतरे के विरुद्ध आपको जगाने के लिये! किसी स्थान विशेष के उल्लेख के साथ आपके धर्म / मजहब वालों के साथ होते हुए अत्याचार आदि के फोटो/वीडियो सहित अनेक संदेश आते रहते है जिनमें से 99% झूठे ही होते हैं… आपको भी सत्यता पर संदेह हो रहा होता है, तब भी आप पहले फारवर्ड करने का धर्म निभाते हैं फिर पुष्टि करने का प्रयास…???   

आपके सहयोग से फैलाई गई  अफवाह  से  यदि  किसी  निर्दोष  की  हत्या  भीड़  द्वारा कर दी जाती है तो भीड़ से अधिक बड़े हत्यारे आप हैं! दुनियाँ की अदालत भले आपको सजा दे पाये या ना दे पाये… किन्तु “उसकी अदालत”  सजा देने में ना पक्षपात करती है ना जरा सा भी रहम !

सावधान रहिये!
सुरक्षित रहिये!
जीवन पर्यंत और जीवनोपरांत भी!

Advertisements
टैग्स: , ,
%d bloggers like this: