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आओ बनायें सशक्त भारत!

आओ बनायें सशक्त भारत!

हमारे देश का दुर्भाग्य है कि जनता प्रतिष्ठित के पीछे पागल है! प्रतिष्ठा; प्रसिद्धि से मिलती है•••
और
इस देश में प्रसिद्धि का सबसे आसान मार्ग अपराध है!

जनता; प्रसिद्ध का प्रसिद्धि पाने में अपनाया गया मार्ग देखने में असमर्थ है!

नेता दिखाना नहीं चाहते क्योंकि “सभी चोर-चोर मोसेरे भाई हैं!”

जिस राजनैतिक दल-प्रमुख को चोरों का मौसेरा कहा जाना चुभ रहा हो वो अपराधियों को टिकट ना देकर मोसेरे चोरों से अपनी निर्लिप्तता प्रदर्शित करे!

अन्यथा चोरों के सहयोगी चोर नहीं तो चोरी को प्रश्रय देकर संप्लिप्तता से स्वयं को मुक्त कैसे कर / कह सकते हैं!

जाने कैसे कब देश जागेगा!

समझ सकने वाले बुद्धिजीवी अकर्मण्य हैं!

जनता भोली है!

अपरधिक पृष्ठभूमि सिद्धों से 33% तक सजी संसद भ्रष्ट नहीं तो क्या है?*

जो राजनीतिक दल प्रमुख अपराधियों के सहयोग बिना चुनाव लड़ने /लड़ाने तत्पर हो मेरा समर्थन उसको अन्यथा सुयोग्य निर्दलीय को  और आपका ???

 (नोटा से बेहतर विकल्प सुयोग्य निर्दलीय को चुनना है! क्योंकि नोटा में हम कम जाने माने किन्तु सुयोग्य उम्मीदवार को भी नकार रहे होते हैं! नोटा में किसी की जीत संभव नहीं!  जबकि स्वच्छ छवियुक्त अगर जीत भी जाये तो सकारात्मक प्रशासन की आशा तो की ही जा सकती है, व हमें कैसा नेता पसंद है यह स्पष्ट होता है सुयोग्य नेतृत्व के अतिरिक्त किसी भी राष्ट्र के पास कोई अन्य उचित विकल्प है ही नहीं!) 

जागना /जगाना हमको ही होगा!!!

राजनीतिज्ञों से अपने पैर पर कुल्हाड़ी चलाने की आशा रखना व्यर्थ है !

यदि भाभारतीय राजनीज्ञों से आप राजनीति को एक तरफ रखकर वास्तविक जन कल्याण की आशा कर रहे हैं तो आप मूर्खता कर रहे हैं जी!

राजनीति से हटकर यहाँ कोई राजनीतिज्ञ कुछ नहीं देखता!

इस देश में राष्ट्र-भक्त / राष्ट्र-द्रोहियों/  लूटेरों/ बलात्कारियों/ हत्यारों पर कार्रवाई हो या सरकारी अस्पताल में इलाज/ मंदिर में दर्शन/ प्रार्थना स्थलों में प्रार्थना/ कांवड़ यात्रा/ गणेश पूजा/ दुर्गा पूजा/ रोजा इफ्तार, ईद मिलन/ तीज/ छठ/ राशन कार्ड बनने से राशन मिलने तक और तो और बड़े-बड़े विवाह समारोह भी राजनीति प्रायोजित हैं•••• और राजनैतिक विरोध बिना नहीं होते!

ऐसे देश में किसी जनहितकारी मुद्दे की ओर, बिना राजनीति किये, कौन देखने वाला है!

-सुबुद्ध सत्यार्चन

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