आगाज-ए-महफिल 

आगाज-ए-महफिल

ना हम आते ना बुलाये जाते तो बहुत अच्छा था•••
अब आ ही गये हैं तो आप भी आ जाते तो अच्छा था •••

शब्द यूँ ही नहीं उछलकूद करते कभी किसी के•••
चंद इल्जाम और जरा आ जाते, तो अच्छा था!

रहे बेआवाज दिल का साज, क्यूँ कब तक?
आकर छेड़ जाते सूने तार••• तो बहुत अच्छा था•••

हुक्म आगाजे महफिल का मेरी खुशनसीबी मगर
ना जलाते दीप हम ही जल जाते तो अच्छा था!

बुलाये गये तो चले आये हैं••• हम यूँ ही उठकर,
अब आप भी आ जाते जनाब तो बहुत अच्छा था!

-सत्यार्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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