आभासी रिश्ते! 

आभासी रिश्ते!  

कहीं तुम आप हो 

कहीं आप तुम क्यूँ? 

कभी किसी भावुक पल

 अपने ही हुए जाते हो 

मगर अगले पल

नजर नहीं आते हो

आभासी दुनियाँ के

आभासी रिश्तों में बँधे

हम खोते हैं••• पाते हैं 

सपने सजाते हैं! 

खोते भी जाते हैं 

  पाते भी जाते हैं! 

ना रिश्ते मरते हैं मगर 

ना नाते कहीं जाते हैं 

ना भावनायें सोती हैं कभी

ना सपने मर पाते हैं 

साँसों के चलने तक हम 

बस यूँ ही जिये जाते हैं! 
 

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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