आशायें और आशंकायें

आशायें और आशंकायें

जैसे हम जीना चाहते हैं वैसे ही जिया जा सकता है…

आशंकित रहेंगे तो आशंकायें सजीव हो समक्ष होंगी

और

आशांवित रहेंगे तो आशायें ….

आशायें और आशंकायें
आशायें या आशंकायें…

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“आशायें और आशंकायें” पर 2 विचार

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...