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आशायें और आशंकायें

आशायें और आशंकायें

जैसे हम जीना चाहते हैं वैसे ही जिया जा सकता है…

आशंकित रहेंगे तो आशंकायें सजीव हो समक्ष होंगी

और

आशांवित रहेंगे तो आशायें ….

आशायें और आशंकायें

आशायें या आशंकायें…

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2 thoughts on “आशायें और आशंकायें”

    1. आपने पढ़ा , जाना, माना, सराहा …. धन्यवाद….!

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