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ईमान खतरे में है —

जहाँ में है रोशन
सियासत नफरतों की,
सुलतान का अब
ईमान खतरे में है!

अमन की फ़िजा में
साँसों का ख्वाहिश मंद,
दुनियाँ का एक-एक
इंसान खतरे में है!!

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अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...

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