एक और लघुकथा

आज खाने वाली ने, रोज की तरह, सुबह के नाश्ते में दलिया परोसा!
नमक ठीक था पर मिठास ना थी। मैंने पूछा “गुड़ नहीं डाला? आज नमकीन बनाने को बोला था क्या माँ ने?” वो बोली “शायद में गुड़ डालना भूल गई! अच्छा हुआ अभी दादी को नहीं भेजा और आपने बता दिया•••”
मैंने कहा “इसीलिए पूछा नहीं तो मालूम है ना अम्मा कितना बड़ा बखेड़ा खड़ा कर देती•••” बोलते बोलते मुझे मेरी एक्स की याद आ गई•••• कहीं वो होती और उसने बनाया होता तो? उसको टोकने से और बड़ा बखेड़ा होने के डर से उसे तो टोकता ही नहीं••• तब••• अम्मा का छोटा बखेड़ा तो झेलना ही पड़ता•••
फिर भी•••
उसका होना और था
बखेडों का कुछ और!

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan