ऐ किसान हो तेरा सम्मान!

तेरे मोल का नहीं…. अब तक कोई अनुमान—

ऐ किसान! 
हो तेरा सम्मान!

बाकी के सब बिक गये

तेरे मोल का नहीं

अब तक कोई अनुमान —


एक तू ही शेष सन्मार्ग पर
तू ही शेष महान !


ना रिश्वतखोरी से तेरा नाता
ना कोई छल ही तुझे भाता


तेरी मेहनत ही तेरा अभियान!
बाकी के सब बिक गये….


तेरे मोल का नहीं

अब तक कोई अनुमान—


तू ही है वह सतपथिक
श्रम जिसका अभिमान!
हो तेरा सम्मान!
तू ही एक महान!


तू संघर्षरत प्रति दिन
हर दिन तेरा प्रयास

हर दिन जय पराजय !
तेरे धीरज को प्रणाम!


तेरे साहस को मेरा नमन !
हों सच्चे तेरे अनुमान!
रहें सफल तेरे अभियान!
हो फलीभूत तू

तब होंगे हम निहाल


तू तो होने ना देगा

भूख से बेहाल!


तेरी उपज के मोल को

सदा मिले वाज़िब मान!


ऐ किसान!

तुझे भी मिले

तेरा वांछित सम्मान!


सत्य अर्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

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