कितने भले हैं लोग!

कितने भले हैं लोग!

लोग, समाज, देश और दुनियां
देख रही है ••• बदल रहा है ••• मिट रहा है ••• उठ रहा है ••• गिर रहा है•••
जैसी बातें तो बहुत होते रहती हैं•••
मगर ये लोग, समाज, देश और दुनियां हैं क्या? कहाँ पाये जाते हैं? इतने खराब क्यों हैं?
है जवाब?
मुझे लगता है कि है!
ये सभी कुछ मैं हूँ! /आप हैं! हम सब हैं! सभी अच्छे हैं! सभी सच्चे हैं••• मगर ना खुद की पूरी तरफ ईमानदारी से देख पाते हैं ना खुद से बाहर अपनों में, ना दूसरों में •••!
*अगर*
मैं कहूँ कि मैं ईमानदारी से खुद को देखता हूँ तो मुझे एक संत समान भला मानुष दिखता है
*तो*
इस वाक्य को पढ़ते हुए ही अनेकों को ऐसी आग लगेगी कि वे भूल जायेंगे कि मैंने इसकी शुरुआत अगर से की है•••• वे आगे इस वाक्य को तक नहीं पढ़ पायेंगे••• आगे पढ़ें जाने की तो छोड़ ही दीजिए !
ऐसा क्यों?
क्योंकि हम सबके संस्कार 80-90% निशेधात्मक शिक्षण के हैं! स्वयं को बड़ा मानना निषिद्ध! कहना अपराध!
किन्तु अपने ईमानदार आंकलन में बुरा ही क्या है?

कैसे करें?

बस स्वयं को स्वयं की तरह मत आंकिये एक परिचित की तरह आंकिये!


इसी तरह अन्य को अन्य के स्थान पर स्वयं को उसके देश, काल, परिस्थितियों में रखकर स्वयं की तरह देखिये!


फिर एकबार फिर से देखकर बताइए कि कैसा है समाज?


शायद मुझसे सहमत हो पायें आप कि लोग, समाज, देश और दुनियां में 95% से अधिक भले और नेक लोग हैं •••• दुपियां बहुत सुंदर है, अच्छी है, भली है!
बुरे लोगों का, बुराई का प्रतिशत तो 1% भी नहीं है••• अच्छे और बहुत अच्छे लगभग 7% किन्तु निष्क्रियों का प्रतिशत सर्वाधिक 98-99% होकर सारा संतुलन बिगाड़ रहा है!
बस हमारा नजरिया बेइमान है•••! इसे  वर्षों पहले देखी बुराई तो साफ-साफ ताजा दिखती रहती है••• याद रहती है••• अच्छाई देखने, सुनने और समझने लायक क्षमता ही गिने चुने लोगों में विकसित हो पाती है और इससे भी बढ़कर समझ लें, तो सराहने की, सराह लिया तो स्वीकारने की, स्वीकारा तो अपनाने की क्षमता तो बहुत ही बिरलों में पाई जाती है!
अगर आ जाये तो????

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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