क्षणिकायें- 1

-प्रीत की रीत-

रिता उसे! 

और तू रीत!

निभे रीत, 

पनपे प्रीत!

मीत मिले,

 गीत बने! 

सजे साज,

  बजे संगीत!

रीत जा 

बीत जा

मिट जा

और 

जीत जा!

ठहरी यही 

प्रीत की रीत!

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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