ख्बाव की ताबीर

अनायास सड़क पर आज एक खिलता सा गुलाब देखा!
नजर पड़ी कि सुलग उठे जैसे हमने आफताब देखा!
खयाल बोला पढ़ ही दीजिए कुछ कसीदे उनकी शान में•••
रोका किया होश दिल ने मगर उनमें आब-ए-शराब देखा!
करता है कौन गुनाह ए इश्क कभी होशो हवास में•••
कितने ही नायाब नाजनीनों का तभी होते बड़ा खराब देखा! 
जता देते जो दिल में था••• कि चाहत है साथ चाय की •••
डिनर आफर हुआ होता••• कुछ ऐसा पड़ता रुआब देखा!

Advertisements

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

आपके आगमन का स्वागत है... जाने से पहले अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...!!!