गुनाह!

गुनाह! 

मानवता को पीट-पीट कर 

मारा जा रहा था•••

वो मानव था करने लगा बीच बचाव,

उसका क्या गुनाह 

उसे क्यों मिलती नहीं पनाह 

चीखता नहीं है वो

पर रुकती नहीं कराह•••

उसके अंदर जीवित हैं  संवेदनायें 

बस यही उसका गुनाह! 

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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