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गुमनाम हैं कई…



गुमनाम हैं कई…

 #जय_हो!

भारत भूमि प्रारंभ से ही विचारकों की उर्बरा शक्ति से युक्त है….  देश में अनेक विलक्षण प्रतिभा संपन्न व्यक्ति आज भी निवासरत  हैं. किन्तु उनकी विलक्षण प्रतिभा को मान नहीं मिल पाता काऱण वे बुद्धिलब्ध तो हैं … किन्तु प्रपंच रचना में पीछे हैं… कुछ को मैं जानता हूँ…

उनमें से एक व्यक्ति जो –
– #GIVEITUP का 2012 से सूत्रधार है,
– 1988 से स्वच्छता अभियान का निवेदक है,

 -2009 से  “Use Social Media Cleanly” का भी प्रवर्तक है।
– 1990 से भ्रष्टाचार उन्मूलन का तैयार फार्मुला केन्द्र सरकार को देने प्रयासरत है
(क्योंकि भ्रष्टान्मूलन केवल ऊपर से नीचे को ही सम्भव है)!
– गरीबी उन्मूलन में गरीबों की अनिवार्य सहभागिता की विचारधारा का जनक है,
– राष्ट्र रूपी इमारत के गठन में नागरिक को ईंटों की तरह देखता/दिखाता है,
– व्यक्ति/विचारधारा/जाति/धर्म के स्थान पर विचार के अनुसरण को वरीयता का सन्देश देता है,
– जागरूकता को नागरिक की प्रथम आवश्यकता का नारा दे रहा है!
वह एक “रास्ता चलता” आम आदमी है …. हमारे वर्तमान प्रधान मंत्री जी ने कनाडा अभिभाषण में उसे इसी नाम से ॉ समबोधित किया था …. गिव इठ अप के प्रवर्तक के रूप में …. इसीलिये वह “रास्ता चलता ” “आम आदमी” है
और तब तक रहेगा भी जब तक
राष्ट्रीय नेताओं, पत्रकारों, प्रतिष्ठितो में
दूसरे के विचारों को बिना मूल्य चुकता किये
यानी चुराकर उपयोग ना करने की
गैरत ना आ जायेगी!
आशा है विचारवान व्यक्ति
अपने अनुभवों के साथ मेरे वक्तव्य पर मुखर होंगे!
#हरि_ओम् !!!
#सत्यार्चन (SathyaArchan /SathyArchan /SatyArchan /
SathyaAnkan /SathyaAlert /SatyAlert)
(वेव पर वैश्विक)

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