गुरु-शिष्य!

गुरु-शिष्य!


जिस समय प्रश्न, या शंका प्रस्तुत की जा रही हो और जब इनका समाधान प्रस्तुत किया जा रहा हो या प्रतिप्रश्न किया जा रहा हो दोनों ही स्थितियो में  प्रस्तोता गुरु और श्रवणकर्ता शिष्य है! अतः सभी वार्तालापों में सभी गुरु और सभी शिष्य हो सकते हैं / होते हैं!

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan