गोपनीय गुनाह!

सर्वोपरि का दंड विधान बड़ा सीधा सादा है… वो आपकी आत्मा को जगाकर आपको आपकी ही नजरों में गिराकर, आपके मन वचन व कर्मों से, आपको, आपके ही  हाथों दण्डित कराता है!

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गोपनीय गुनाह!

एक दोस्त ख़फ़ा था, उस ने कहा कि वो मेरा क़त्ल इतनी सफाई से कर सकता है कि कोई भी और क़ानून भी उसपर शक तक नहीं कर सकेगा….
मैंने कहा यार तू कह भर दे तो मैं हँसकर मर जाऊं…. मगर क़त्ल की, (या किसी भी गुनाह की) कानूनी सजा तो बहुत छोटी होती है, बड़ी सजा वह होती है जो सर्वोपरि देने वाला होता है, बिलकुल अकेले में, आजीवन पूरी तरह गोपनीयता बनाये रखकर भी, किये गए किसी भी अपराध की… सजा तो सुनिश्चित है…

सर्वोपरि का दंड विधान बड़ा सीधा सादा है… वो आपकी आत्मा को जगाकर आपको आपकी ही नजरों में गिराकर, आपके मन वचन व कर्मों से, आपको, आपके ही हाथों दण्डित कराता है!

जो जितना कम दुष्ट उसकी आत्मा उतने ही जल्दी जागती है उसे किंतु दुष्टतम मनुष्य की आत्मा भी कभी ना कभी तो जरूर जागती है… जगाता जरूर है ‘वो’… फिर चाहे वृद्धावस्था में या मृत्यु के आमुख आते आते ही सही… तो

छीनिये और छीनते रहिये,

इस-उस के हिस्से का मान
पर छीने हुए के भी छिनते में,

छटपटायेंगे तो प्राण!

-सुबुद्ध सत्यार्चन

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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