चुनाव2019 के भीष्म

सम्पूर्ण राजनीति और सभी राजनीतिज्ञों को निकृष्ट मानने, समझने, जताने का अर्थ श्रीराम, श्रीकृष्ण को निकृष्ट मानना नहीं है क्या? क्या आप दुर्योधनों के कारण युधिष्ठरों के अपमान के दोषी नहीं बन रहे?

किसी की राजनीति बिषय पर गहन आपत्ति है कुछ को “लेखन हिन्दुस्तानी” साहित्यिक की जगह राजनैतिक लग रहा है… उनकी आपत्ति पूरी तरह सही हो सकती है…. किन्तु कुछ किंतु-परंतु के साथ….
– हर लेखक समाज का अग्रणी जागरूक नागरिक है… और उसका भीष्म पितामह की भूमिका में रहना निंदनीय है…. दोनों स्थितियों में… तब भी जब चीरहरण हो रहा था और भीष्म पितामह मौन थे… और तब भी जब धर्मयुद्ध में वे अधर्म की ओर से लड़ रहे थे…
आज भारत की 80% जनता चीरहरण कराती द्रोपदी सी निरीह स्थिति में है… कौरव, पाण्डव और उनके जैसे अन्य छोटे बड़े राजघराने मिलकर चीरहरण को प्रयासरत हैं…. अनेक दुर्योधन अनेक अर्जुन अनेक शकुनि और बहुसंख्य कर्ण… हम भीष्मों का मुंह ताक रहे हैं…और हम राजनीति से निष्पृह रहने की भीष्मप्रतिज्ञा लिए बैठे हैं… या फिर दिल्ली या हैदराबाद की राजगद्दी में से किसी को चुनकर उनके काले-पीले हरे-नीले सबमें उनके साथ खड़े हैं….! दोनों अनुचित हैं!!!!

जागरूक हैं तो जगाने के दायित्व से बिमुख नहीं हो सकते!

सम्पूर्ण राजनीति और सभी राजनीतिज्ञों को निकृष्ट मानने, समझने, जताने का अर्थ श्रीराम, श्रीकृष्ण को निकृष्ट मानना नहीं है क्या? क्या आप दुर्योधनों के कारण युधिष्ठरों के अपमान के दोषी नहीं बन रहे?

  • विशुद्ध प्रचार के वीडियो, लेख या लिंक साझा नहीं किये जाने चाहिए किन्तु चुनाव के मौसम में सबके उत्साहपूर्ण अनैतिक आचरण अनदेखे करना ही उचित है इसीलिए…. चुनाव के बाद सख्ती से केवल साहित्यिक (राजनैतिक साहित्य भी) गतिविधियों ही स्वीकार्य रहेंगी…!
    चंद दिनों की असुविधा के कारण ब्लाॅग/ समूह मत छोड़िये मित्र…. कल सुनहरा ही होगा…. अच्छे पल अवश्य आयेंगे!
  • सत्यार्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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