जन्मेगा या भ्रूणहत्या…

जन्मेगा या भ्रूणहत्या…

सत्य क्या है? .

जैसे तीसहजारी वाली…

मां तथ्या के
गर्भ में छुपा है

वैसे ही सदा छुपा होता है…


महीनों बाद
गहन प्रसव पीड़ा उपरांत…
जीवित जन सकी
तो शिशु सत्य जन्मेगा
अन्यथा
भ्रूण हत्या का युग है

गर्भ समापन होगा?

कुछ सप्ताहों में
किस चिकित्सक ने
किसके कहने से
किस नाली में बहाया…

कौन जान सकेगा…

पूछेगा कौन
कौन याद रखेगा ?
.

शायद याद हो

कभी तथ्या काकी
हारकर नियति से
टेस्टट्यूब सेंटर तक हो आई थी …
उन दिनों
उसके ढलते बदन पर भी
गहरी लाली छाई थी…
पर पता नहीं
पता चल भी पाया हो

तथ्या काकियों को कभी कि….
किसके कहने से

किस-किस ने मिलकर

कहां-कहां….

कब-कब उसके भ्रूण की

हत्या करवाई थी?


कौन पूछता है हमारे यहां
भ्रूण का बनना…
किसी तथ्या की कोख में
किसी विश्वसुंदरी सी
सत्या का पलना…
कौन सोचता है?
पानी के बुलबुले से
भ्रूण बनते रहते हैं….
अच्छे उत्पादक हैं हम
फसल तो अच्छी ही उगाते हैं…
पर अपनी ही उपज की
गुणवत्ता पर
विश्वास कहां जताते हैं…
अपने आपको या
अपने उत्पादों को हम
कमतर से बढ़कर

बदतर आंकते हैं…


शुभ की कामना से अधिक
अशुभ की आशंकाएं लिए

अनिष्ट को हम ही बुलाते हैं…!
और तो और
आशंका के सजीव होने में
हम विजय सुख पाते हैं…!


हमारे अधिकांश प्रयास
निस्तेज ही होते हैं…
जैसे विवशता हो…

प्रयास करना…
ऐसे वेमन से किए जाते हैं…


तभी तो सत्य युग-युगान्तर में…
कभी कभार ही जन्म पाते हैं…
किंतु अजन्मे सत्य के भ्रूण
मां तथ्या के गर्भ में तो
हर दिन ही मारे जाते हैं!


जाने अब कभी
इस युग में
जन्म सकेगा सत्य?
या निस्तेज होती तथ्यायें…
बांझ कहलाते मरती जायेंगी….!!!

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

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