जयति जय जय मां

जयति जय जय मां!

आज शारदीय नवरात्रों के शुभारंभ पर सबको शुभकामनाएं!
मैं भी व्रती हूँ! सन्मार्गी हूँ! सदैव रहना चाहता हूँ!
*सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया:*
*सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दु:खभाग्भवेत!*
*अर्थात सभी सुखी हों सभी रोगमुक्त हों सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें! किसी को भी दु:ख का भागी ना बनना पड़े!*
पूरी तरह सच्चे मन से… व निरपेक्ष रहते हुए उपरोक्त श्लोक के मूलभाव के उद्देश्य को मन में धारण रखते हुए…


*अंतर्चेतना में उद्घाटित कुछ नव संदेश सबसे साझा करना चाहता हूँ!*
हम हमारी मानवीय संस्कृति के संरक्षक बनें! मानवता के अनुसरणकर्ता हैं तो समझ लें..   कि “वर्तमान सत के स्थापित होने और असत के विस्थापन का चल रहा है…! चाहे घर हो, समाज हो, देश हो या दुनियां…. सत के मार्ग में बाधक होना यानी सर्वोपरि का कोपभाजन होना है! ‘उसे’ बस प्रकृति को इशारा ही तो करना है… और बड़े से बड़ा सुदृढ़तम स्तंभ भी ढह जाना है..! सत का मार्ग …. सदाचार का मार्ग अपनायें… सन्मार्गी बनें, सन्मार्गियों के समर्धक बनें… सतपथ के अनुगामी बनें, स्थायी सुखी हो जायें…! कम से कम सतपथ के पथिकों का विरोध तो ना ही करें…! सतपथ के पथ पर चलने वालों पर ईश्वर का आशीष सदा से रहा है और रहेगा…! फिर चाहे वह सत्पथिक हाथी सा विशालकाय हो या चींटी सा सूक्ष्म!

@जय माता दी!#

-सुबुद्ध सत्यार्चन!
(आश्विन नवरात्र- प्रतिपदा!)

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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