ज़िंदगी — स्पंदन

ज़िंदगी एक दिन मिली थी राह में मैंने कहा , आ बातें करें तनहाई में बेवफ़ा है तू बड़ी हर बात में , चलती कहाँ है तू मेरे जज़्बात में !! छोड़ दिया था साथ मेरा , बीच राह में !! थक गया हूँ , मैं तेरी हर चाल में कैसे फँस गया हूँ , […]

via ज़िंदगी — स्पंदन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“ज़िंदगी — स्पंदन” पर 4 विचार

    1. आपकी उत्सुकता एवं आपत्ति का जबाव देने आपकी एक और पोस्ट आपके ब्लॉग पर उपलब्ध शेयर बटन ‘प्रेस दिस’/’रिब्लाॅग’ का उपयोग कर पोस्ट की है “जिन्दगी” छोटी रचना थी इसीलिए आपके ब्लाॅग ‘स्पन्दन’ के लिंक सहित पूरी प्रकाशित हुई किन्तु ‘काठमाण्डु…” बड़ी है इसीलिए “और पढ़ें…” तक मेरे ब्लाग पर और आगे आपके ब्लाॅग पर ही पढ़ी जायेगी….यह वर्डप्रेस का पिंगबैक/ ट्रेकबैक टूल है जिसके उपयोग से कोई अन्य संद्भावी ब्लाॅगर हमारे ब्लाॅग को प्रमोट करने के लिए कर सकता है! सामान्यतः ऐसी सद्भावी पहल कोई करता नहीं… शायद इसीलिए आप इससे अपरिचित होंगी… मुझे, मेरे सद्भावी प्रयासों के का कारण गलत समझे जाने का लम्बा अनुभव है, पहले गुस्सा आता था अब आदत पड़ गई है!
      आप तक मेरा स्पष्टीकरण पहुंचते ही आपसे प्रत्युत्तर अपेक्षित है! कोई सकारात्मक उत्तर ना मिलने पर अधिकतम 3 दिन में आपकी दोनों पो
      ट्स का प्रमोशनल साझाकरण समाप्त कर दोनों पोस्ट मेरे ब्लाॅग से हटा दी जायेंगी!
      असुविधा हेतु क्षमा !

      1. विस्तार से समझाने के लिए धन्यवाद । क्षमा चाहती हूँ कि मैं अनभिग्य थी । आपके प्रयास प्रशंसनीय हैं । मैं अधिक नही जानती इसलिए थोड़ा हैरान थी । आपसे संपर्क करके अच्छा लगा ।

आपके आगमन का स्वागत है... जाने से पहले अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...!!!