कुर्बानी- नेकी के लिए!

अब से “ईद-उल-जुहा” पर नेकी के नाम नेकी के लिए नेक कुर्बानी देने का वादा अपने आपसे कीजिए! रक्तदान करके… खुद अपनी कुर्बानी दीजिए…!

सभी मजहबों/ धर्मों की किताबों में लिखे वाकये वो नजी़रें हैं जिनको अमल में लाया जाना ही मुनासिब है…

इस्लामिक आस्था से जुड़ी, “कुर्बानी” भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण घटना है!

इस्लाम में कुर्बानी की शुरुआत का जिक्र, सर्वोपरि “हुजूर” का अपने फालोअर्स में सबसे अधिक वफादारी का दम भरने वालों की मौजूदगी में, उचित को चुनकर उसे कपनी वफादारी साबित करने के इम्तेहान से गुजरने का मौका दिया! जिसके लिए उन्हें अपने बेटे की कुर्बानी देने को कहा गया. तब पिता अपने बेटे की कुर्बानी देने को, और बेटे का कुर्बान होने के लिए खुशी-खुशी तैयार हो जाने का वाकया लिखा है! हुजूर के दरबार में घटी इस घटना के दृश्य में पिता की आंखों पर पट्टी बांधकर बेटे की तलवार से कुर्बानी दी जाना और कुर्बानी के बाद पट्टी खुलने पर बेटे की जगह गर्दन कटे हुए बकरे का देखा जाना, बताया गया है!

इसमें एक से अधिक सीख समाहित हैं…

1- जब तुम्हारे बुजुर्ग, जो हुजूर की जानिब से तुम्हारे कुदरती खैरख्वाह हैं, के हुक्म की तामील करो… बिना किसी शक-ओ-शुबहा के बस अमल करो!

2- अगर तुम सच्चे हो, ईमान पर हो और तुम्हें तुम्हारी सच्चाई का इम्तेहान सबके बीच देने कहा जाये तो दिखा दो कि तुम सच्चे हो!

3- नेकी की राह कुर्बानी चाहती है… नेकी के लिए कोई भी कुर्बानी छोटी है…!

रमजान आने को हैं फिर “ईद-उल-जुहा” ! तो अब से “ईद-उल-जुहा” पर नेकी के नाम नेकी के लिए नेक कुर्बानी देने का वादा अपने आपसे कीजिए! रक्तदान करके… खुद अपनी कुर्बानी दीजिए…! रक्त बहाने के लिए नहीं सहेजने के लिए हो आपकी कुर्बानी! किसी को ज़िन्दगी देने के लिए हो आपकी कुर्बानी…

जरूरी होने पर जब औरों से आंखें, लीवर, किडनी, ब्लड, बांह, मांस, होंठ आदि लिए जाने में मज़हब आड़े नहीं आता है तो इत्मीनान रखिये, इनके दिये जाने में मज़हब दीवखै कैसे हो सकता है! चाहें तो अपने मौलाना से मशविरा करें और जायज़ पायें तो आगे बढ़ जायें… दीन के काम आकर मुस्लिम समुदाय को इज्जत बख्शने की वजह बन जायें!

जिस-जिस इंसान या मुसलमान का इस मशविरे से इत्तेफाक हो वो इसे आगे बढ़ाकर दुनियां में मुस्लिमों की दीगर दुनियां से बढ़ती दूरी घटाने का रास्ता बनायें! इंसानियत के नाम इंसान होने का सबूत दें! इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर कर इंसानियत के काम आयें! इस्लाम का रुतबा ऊंचा रखने अपनी कुर्बानी देकर दिखायें!

सबसे अच्छी वो कुर्बानी, जो दे किसी को जिंदगानी!

-सत्यार्चन सुबुद्ध

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

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