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जी चाहता है…

जी चाहता है
खुलकर
नथुने भर सांसे भरना
दीवारों से दूर
खुले में
कहीं मिल जाये ताजी हवा
कुछ दिनों के लिए…
जी आऊँ जी भर
फिर से
ताजा दम हो
पल-पल मरने के लिए….
.
जी चाहता है
अब
उड़ना
दूर तक
उन्मुक्त गगन में
बहुत दूर तक…
अंतरिक्ष तक
या उसके भी पार कहीं
.
जी चाहता है
निकल पड़ूं घर से
होकर यायावर
घूमूं तब तक सारा संसार
जब तक कोई दरवाजा
स्वागतेय ना खुले
मेरे लिए
जहाँ
हो कोई प्रतीक्षारत
मेरे लिए….
लिए अधझुकी प्यासी आंखें
बिन खुली बाँहों से आतुर
अंक में भरने को ….
– चर्चित चित्रांश-

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1 thought on “जी चाहता है…”

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...

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