ज्ञानोद्भव

यह नजरिया ही है जो मानने से रोकता है किन्तु जिज्ञासु के मन में जानने की प्यास/ जिज्ञासा भी यही जगाता है और प्यास सदाशयी बनाती है… आगत के स्वागत को तत्पर…
ज्ञान के पादप का पल्लवन तभी संभव है जब ज्ञान का बीज ज्ञान की भूमि में रोपित, ज्ञान के जल से सिंचित, ज्ञान के उर्वरक से पुष्ट, ज्ञान के प्रकाश से आलोकित, और ज्ञान के कीटनाशक से दोषरहित रह, ज्ञानपूर्ण पोषण पा सके!

-सत्यार्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...