डिजिटल इंडिया के पथ गढ़ता…

आज के डिजिटल इंडिया, यूआईडी (आधार कार्ड), बिचौलिए हटाकर सीधे हितग्राही तक सब्सिडी पहुंचाने (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर), स्वनियंत्रित स्वतंत्र चुनाव आयोग, दल-बदल निरोधक व्यवस्था, राष्ट्रीय संस्कारों की रीढ़, शिक्षा प्रणाली, में
आजादी से अब तक हुए एक मात्र परिवर्तन जिससे राष्ट्रीय एकरूप व स्तरीय शिक्षा संभव हुई… इन स्वप्नों के सर्वप्रथम पोषक, प्रस्तोता व आधार शिला स्थापक, स्वर्गीय राजीव जी ही थे… बस तब नाम कंप्यूटरीकरण (जिसके विरोध में समूचा तत्कालीन विपक्ष था), विशिष्ट पहचान संख्या / आधार कार्ड/ नन्दन नीलकणि प्रोजेक्ट (जिसका प्रबल विरोधी भी तत्कालीन विपक्ष 2014 तक रहा).

तब देश को इक्कीसवीं सदी में ले जाना है, (जाने योग्य बनाना) जैसे जुमले चलते थे … आज 2014 में जिस डिजिटल इंडिया, डीबीटी, की बात चल रही है उस पर राजीव जी 1985 में काम करना शुरू कर चुके थे…. वे बने रहते तो 2004 तक हम आज से भी 25 बर्ष आगे निकल चुके होते ….!

देश का दुर्भाग्य अब फिर सौभाग्य में बदला है… आज वैसी ही प्रगतिवादी सोच रखने वाले प्रधानमंत्री, माननीय नरेन्द्र मोदी जी, पद पर सुशोभित हैं शायद 2024 तक भारत सभी वांछित लक्ष्य प्राप्त कर ले…! शुभाकामनाएं!!!
-‘SathyaArchan’

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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