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तंदुरुस्त तन्हाइयाँ

तंदुरुस्त तन्हाइयाँ
चलती सड़क पर
सूना सा मेरा  घर
दिलवालों की दौड़
लगी रहती दिन भर —
तनहाई बहुत यहाँ
तनदुरुस्त है मगर —
काश कोई दस्तक हो
कोई आवाज लगाये —
पानी माँगने आये
या पता ही पूछ जाये
कोई प्यास ना बुझाये
रखे – – –
आस ही जगाये!!!

#सत्यार्चन

….. अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द…

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2 thoughts on “तंदुरुस्त तन्हाइयाँ”

  1. glimpseandmuchmore कहते हैं:

    ये तन्हाईयां जीवित खंडहरों की हैं जो हमनेनवम्बर के लास्ट ईयर के ब्लॉग में लिखा है क

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...

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