तंदुरुस्त तन्हाइयाँ

तंदुरुस्त तन्हाइयाँ
चलती सड़क पर
सूना सा मेरा  घर
दिलवालों की दौड़
लगी रहती दिन भर —
तनहाई बहुत यहाँ
तनदुरुस्त है मगर —
काश कोई दस्तक हो
कोई आवाज लगाये —
पानी माँगने आये
या पता ही पूछ जाये
कोई प्यास ना बुझाये
रखे – – –
आस ही जगाये!!!

#सत्यार्चन

….. अपेक्षित हैं समालोचना / आलोचना के चन्द शब्द…

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“तंदुरुस्त तन्हाइयाँ” पर 2 विचार

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