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दर्पण- मीडिया! 

दर्पण- मीडिया!  

दर्पण निरपेक्ष है!

दर्पण के पेट नहीं है, वह भूख प्यास से परे है!

दर्पण लालच से परे है!

दर्पण अपने और अपनों के  दर्द से ना व्याकुल होता है ना ही इसके डर से आतंकित!  

इसीलिए दर्पण निष्पक्ष है!

मीडिया की आदर्श भूमिका दर्पण सी होने की अपेक्षा अनुचित नहीं है किन्तु मीडिया संचालकों में उपरोक्त सभी लौकिक गुण स्वाभाविक रूप से विद्यमान हैं नारद जी के काल से ही!

 किसी युद्ध मोर्चे में  पराजय या राज पुत्र की हत्या जैसे शोक संदेश वाहक की निरंकुश राजाओं द्वारा गर्दन काट डालने के  अनेक उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है!

इसीलिए केवल मीडिया को दोषी ठहराना कितना उचित है यह आप ही सोचिये!  

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