नजर •••

नजर •••

ये जो नजर है तेरी
कहर है हम पर
उठती है झुकती है•••
तीर सी चुभती है•••
मचलता है वर्षों दिल •••
सुलगता रहता है जिस्म!

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...