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नियुक्त, नियुक्ति, नियोक्ता

नियुक्त, नियुक्ति, नियोक्ता

नियुक्ति…

#नियोक्ता_का_उपकार_नहीं

#विवशता_है!

और

#नियुक्त_का_अधिकार_है_वेतन…

नियुक्त से प्राप्त

#उत्पादकता

के बराबर का

#मूल्य_कोई_भी_नियोक्ता_नहीं_चुकाता…

#ना_ही_चुका_सकता…

नियुक्त की

उत्पादकता से

नियोक्ता को हुई

प्राप्तियों का
#बहुत_छोटा_सा_अंश_ही_मानदेय_रूपी_वेतन

होता है …

नियुक्त का

कर्तव्य
#नियोक्ता_का_हित_संरक्षण

और
नियोक्ता का
#उचित_व_समय_पर_मानदेय / वेतन !

कार्य के

उपस्कर जुटाना,
नियोक्ता का
और
उनके उपयोग से
सर्वोत्तम उत्पादकता
निकालना
नियुक्त का
#दायित्व है!

– अपर्याप्त, #अस्तरीय #उपस्कर
नियोक्ता का

पूरी क्षमता से

#कार्य #सम्पादन

ना करना
नियुक्त के
#मुख्य #दोष हैं!

नियोक्ता के

हितसंरंक्षण में ही

नियुक्त का हित निहित है!

नियुक्त की

सर्वांगीण

आवश्यकताओं, आकस्मिकताओं, सामाजिक प्रतिष्ठा, मनोरंजन व कल्याण के साथ साथ शुभाशुभ में सहयोगी होने वाले

नियोक्ता की

उत्पादकता

अपरिमित होती है!

जीवंत उदाहरण देखने के इच्छुक गूगल की कार्य पद्धति का अवलोकन कर सकते हैं!

गूगल की ही तरह तेज गति से आगे बढ़ता हुआ एक नवोदित भारतीय उद्योग है ट्रेकविन!

(ट्रेकविन के लिये, मेरी शुभकामना सहित, अगले 5 सालों में विश्व के सर्वोच्च 10 में सम्मिलित होने की भविष्यवाणी भी है!)

(व्यावसायिक, औद्योगिक आंकलन, समीक्षा, योजना व स्थापना संबंधी सलाह सशुल्क उपलब्ध)

#SathyaArchan

– सत्यार्चन

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