निष्फल-सत्संग!

निष्फल-सत्संग! 

अपनी प्रेक्षण क्षमता व उपलब्ध साधनों की सहायता से एक बार अपने आसपास, परिचितों, समाज,  देश में,  स्वयं ही देखकर निम्न का आंकलन कीजिए-

1- प्रतिष्ठित भजन /कैरल्स / सूफी के गायक।

2- प्रतिष्ठित ‘भक्ति-काव्य’ गायन मंडली के प्रमुख।

3- प्रतिष्ठित प्रवचन-कर्त्ता!

4- प्रतिष्ठित पुजारी / पादरी /मौलाना!

5- प्रतिष्ठित उपदेशक••• आदि!

ध्यान दीजिएगा मैं यहाँ प्रतिष्ठित की बात कर रहा हूँ प्रसिद्ध की नहीं!

क्या इन सभी से हमें सराहनीय! बहुमूल्य! अति उपयोगी! वंदनीय व अनुकरणीय! वचनामृत की प्राप्ति होती है?

इन सबके व्यक्तित्व में एक विशिष्ट समरूपता मिलती है••• और वह है उनका सौम्य, संतुलित, सहृदयी व सारगर्भित व्यवहार सहित वे तेजोमय  प्रभामंडल युक्त दिखते हैं! अदम्य साहसी होते हैं किन्तु आक्रामक नहीं! क्यों?

क्योंकि धार्मिक साहित्य में निहित संदेशों को निरंतर सुनाते हुए वे स्वयं भी सुन रहे होते हैं, समझ रहे होते हैं! धीरे- धीरे यही सदाचार उनका सहज व्यवहार बनते जाता है! जो जितनी तेजी से अंगीकार कर पाता है वह उतना ही जल्दी प्रतिष्ठित हो पाता है!  प्रतिष्ठित होने पर स्थायी प्रसिद्धि, स्थिर वैभव की प्राप्ति सहज हो ही जाती है !

किन्तु जनसाधारण जो कभी कभार या अकसर भी भजन, प्रवचन, कथा, सत्संग आदि सुनता है ! उनमें से  अधिकांश लोग यह जानते-मानते हैं कि धर्म कथा के श्रवण से पुण्य या लाभ मिलता है किन्तु यह नहीं जानते कि क्यों और कैसे मिलता है! वे सुने गये को आदर्श तो मानते हैं  किन्तु उन आदर्शों पर चलने के लिये स्वयं को सर्वथा अयोग्य भी मानते हैं! यही कारण है कि घंटों पूजा-पाठ करने वाले और नियमित सत्संगियों में से आधे आराधक; ‘संशययुक्त आस्थावश’ अपनी आराधना व आराध्य दोनों से ही असंतुष्ट बने रहते हैं!

जबकि सदाचार कतई असंभव नहीं है! और संसार में रहकर शतप्रतिशत  सदाचारी (सम्पूर्ण)  तो कोई हो ही नहीं सकता••• अवतार भी नहीं••• किन्तु संसार सागर से “निष्फल” चले जाने से पहले

उत्तीर्ण होने योग्य प्रतिशत पाने के प्रयास में तो हर कोई सफल हो सकता है!

 जरा से गहन और गंभीर प्रयास प्रथम श्रेणी भी दिला देंगे!

चिरंतन व निरंतर  प्रयासों से प्रवीणता भी मिल सकती है! 

बस इस परीक्षा में कोई सर्वोच्च नहीं होता! क्योंकि सबको अपना अपना ही अंतिम परिणाम प्राप्त होता है ••• किसी अन्य  का परिणाम किसी अन्य को बताया ही नहीं जाता!

-सुबुद्ध सत्यार्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“निष्फल-सत्संग!” पर 2 विचार

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