पशु मनुष्य! 

पशु मनुष्य! 

वास्तव में तो मनुष्य निकृष्टतम पशु है!

कोई भी पशु प्रकृति के अनुरूप जीवनचर्या से नहीं भागता! मूर्ख  मनुष्य प्रकृति को ही वश में करना चाहता है! 

कोई पशु अपने जीवन यापन भोजन आदि की पूर्ति के लिए सजातीय पर निर्भर नहीं रहता ! वह अपनी आवश्यकता की पूर्ति स्वतः ही करता है! जबकि मनुष्य ••••

किसी जाति का कोई भी पशु अब तक अवयस्क साथी से बलपूर्वक समागम नहीं करता! केवल मनुष्य ही करता है! 

काश मनुष्य पशुवत हो पाये!

-सत्यार्चन सुबुद्ध  

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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