-: प्रतिमान :-

  • प्रतिमान –
    जीवन पथ पर चलते-चलते,
    नये-नये उनवान मिले!
    हर एक मोड़ पर अटके-
    भटके,
    कई-कई भगवान मिले!

    गिरते , उठते, चलते , फिरते
    हैवान मिले , शैतान मिले!
    जीवन द्वंद युद्ध सा लड़ते
    कभी-कभी इंसान मिले !

प्यास बुझी ना बुझते दिखती

जी ली प्यास, बुझे ना बुझे अब

जी लिया जीवन सारा प्यासा
अब ना नया प्रतिमान मिले!!!


#सत्यार्चन

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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