बताना मुझे आता नहीं…

… बताना मुझे आता नहीं …

मतकर दोस्त…

रहने दे आज

हँसने का,

जरा भी,

जी नहीं…

मुफलिसी का दौर है,

और छलक गई…

ठीक से पी नहीं…

.

इश्क है

जताता भी हूँ पर…

जाँचना तुझे आता नहीं ..

बताना है तुझे

कितनी चाहत है  मगर…

बताना मुझे आता नहीं…

.

मेरी जानिब तू भी

बेकरार तो है

इकरार कर…

इजहार मेरा दिखता है तो

तोड़कर दीवार,

इश्क का दीदार कर

इसरार ही में

ना बीते बाकी

खुद पर अब तो ऐतबार कर….

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“बताना मुझे आता नहीं…” पर एक विचार

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