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बताना मुझे आता नहीं…

… बताना मुझे आता नहीं …

मतकर दोस्त…

रहने दे आज

हँसने का,

जरा भी,

जी नहीं…

मुफलिसी का दौर है,

और छलक गई…

ठीक से पी नहीं…

.

इश्क है

जताता भी हूँ पर…

जाँचना तुझे आता नहीं ..

बताना है तुझे

कितनी चाहत है  मगर…

बताना मुझे आता नहीं…

.

मेरी जानिब तू भी

बेकरार तो है

इकरार कर…

इजहार मेरा दिखता है तो

तोड़कर दीवार,

इश्क का दीदार कर

इसरार ही में

ना बीते बाकी

खुद पर अब तो ऐतबार कर….

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1 thought on “बताना मुझे आता नहीं…”

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...

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