भलाई घायल है… बचा लीजिए!

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शुभ दिन!

अच्छाई, भलमनसाहत, इंसानियत, सच्चाई, भलाई की नश्ल वैसे ही विलुप्ति के निकट है! संसार में गिने चुने सच्चे और भले जन शेष हैं अगर उनमें से कहीं कोई निराश है… अपराजित सत्य आहत है, अमर भलमनसाहत मृत्यु शैय्या पर, अजेय अच्छाई निढाल और भलाई अंतिम सांसें गिनती सी बदहवास तो आइए इस मिटती नश्ल के संरक्षण में अपनी भावनात्मक छुअन से इसके पुनर्जीवन में अपना योगदान दें!

शुभ बसंत!

-सत्यार्चन सुबुद्ध
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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...