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मधुरिमा 

मधुरिमा 

आज के “दैनिक भास्कर” में सम्मिलित महिलाओं को समर्पित पत्रिका “मधुरिमा” भी है! मैंने देखी••• आप भी देखिए!

आज की “मधुरिमा” मुख्य पृष्ठ क्र• 1 व 2 मिलाकर 11 रचनाकार हैं! छपे नामों के अनुमान अनुसार  इनमें 9 पुरुष व 2 महिला रचनाकार हैं! यह तब है  जब भास्कर समूह महिला रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के प्रयास करते रहता है! कुल 8 पृष्ठ देखने पर स्थिति थोड़ी ठीक लगी- 15 पुरुष व 10 महिला रचनाकार••• किन्तु “मधुरिमा” मुख्यतः महिलाओं की पत्रिका है!  नैसर्गिक रूप से ही पुरुष से बड़ी रचियता की रचना-धर्मिता को हुआ क्या है? वो स्तरीय रचनाएँ रचने में क्यों पिछड़ी हुई है?  आरक्षण अक्षम की अक्षमता का आश्रय हो सकता है किन्तु जो सक्षम हैं उन्हें स्वयं ही स्वयं को निखारना होगा ना!

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अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...

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