मनमर्जियां

मनमर्जियां

अपनी अपनी खुदगर्जियां •••!

अपनी अपनी मनमर्जियां •••!

है अपनी अपनी शिद्दत•••

अपनी अपनी फितरत!

इनका सही इनको सही•••

उनका गलत इनको गलत•••

जिसके जी को जो भाये •••

वो रीत वही अपनाये!

कभी किसी दिन मगर

समझाने को सही गलत

गवाह बनती है खुद कुदरत!

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“मनमर्जियां” पर 2 विचार

    1. बहुत बहुत धन्यवाद मित्र!
      आमंत्रित हैं आप भी अपनी रचना और ब्लाॅग लिंक्स के साथ लेखन हिंदुस्तानी के “आईये भारत को समृद्ध करें!” के अनुरूप!

आपके आगमन का स्वागत है... जाने से पहले अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...!!!