मरणासन्न संस्कृति!

मरणासन्न संस्कृति!

भारतीय संस्कृति की दृढ़ता और सामर्थ्य अंग्रेज शाशक भी अच्छी तरह पहचानते थे इसीलिये उन्होंने सबसे पहले अंग्रेजी भाषा का प्रसार प्रचार कर अंग्रेजी को रोजगारपरक बनाकर, हर भारतीय की अनिवार्यता बनाया फिर अगली पीढ़ियों को मानसिक गुलाम बनाने के उद्देश्य से शिक्षा पद्धति को पतित किया फिर शिक्षण संस्थानों को अपने अधिकार में ले गुलाम बुद्धिजीवियों की फसल उगाई और अब माद्यम (मीडिया) को धीरे धीरे आदर्शवाद की खाल उड़ाकर “नुक्कड़”, “हम लोग”, “बुनियाद”, “रामायण”, “महाभारत” से शुरू कर विवाहेतर संबंधों की वकालत करने वाले सीरियलों तक पहुंचाया! अब भ्रष्टतम की ओर ले जाया जा रहा है! आज हजारों डेटिंग ऐप्प्स की उपलब्धता के अलावा डेटिंग टिप्स पर राष्ट्रीय चैनलों पर प्रोग्राम दिखाये जा रहे हैं और हम सब के सब सो रहे हैं!

-सत्यार्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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