मुरझाया फूल

मुरझाया फूल

दिल में आया
फूल मुस्कुराया!
दिल में समाया
फूल मुरझाया!!
सच कहूँ तो फूल
नहीं जीता तुम्हारी तरह
आस में निराश में
वो नहीं सुनता है
कब कौन क्या कहता है
जो हो रहा होता
बस वही समझता है!
डाली पर होता है
तो भरपूर खिलता है
टूटकर बिछड़ता है तो
चंद ही पल जीता है
आस छूटते ही
साँस तोड़ देता है !
फूल होता है खिलने को
इसलिए खिलता है!

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

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