मेंहदी तो रंग लाती है…

मेंहदी तो रंग लाती है…

तोड़ी जाती है
पीसी जाती है
फिर भी
मेंहदी तो रंग लाती है…
.
सजनी के हाथों सज
साजन की
मुस्कान बन जाती है
बड़ी करामाती है
तोड़ी जाती है
पीसी जाती है
फिर भी
मेंहदी तो रंग लाती है!
.
मेंहदी की भी ख़्वाहिश
यही रही होगी
मिट जाऊं
पिस जाऊं
हर एक सजनी को मगर
ऐसे सजाऊं
ऐसे रच जाऊं
कि
उम्र गुजर जाये
उतारे से भी रंग
कभी उतर ना पाये!
साजन, सजनी की
और सजनी
साजन के
दिल की
धड़कन बन जाये!
तोड़ी जाती है
पीसी जाती है
फिर भी
मेंहदी तो रंग लाती है…!
.
जब मेंहदी हाथों में
और
दिल में साजन को
सजनी सजाती है
मेंहदी
गहरी…
बहुत गहरी
ऐसे रच जाती है…
उम्र गुजर जाती है
उतर नहीं पाती…
गहराती जाती है.
बड़ी करामाती है
तोड़ी जाती है
पीसी जाती है
फिर भी
मेंहदी तो रंग लाती है!
-सत्यार्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

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