मेरा देश बदल गया!

मेरा देश बदल गया!

आगे निकल गया•••

मेरा देश बदल गया!

(02102018 को लिखा गया किन्तु किसी कारणवश पोस्ट नहीं हो सका अतः अब पोस्ट किया जा रहा है!)

एक दृश्य देखिए- अंदर चाचाजी उनके ताऊ, यानी दादाजी, की समाधि पर ध्यानस्थ मुद्रा में सादर सर झुकाए बैठे हुए होते हैं और समाधि स्थल के द्वार से लेकर दूर दूर तक चाचू के भतीजे, बेटे समाधिस्थ दादाजी को गरियाने वालों का नेतृत्व कर रहे होते हैं!
चाचाजी की जाने ये कैसी कौटिल्य नीति है??? वो भतीजों से नाराज़ होते नहीं और दादाजी जी से हो नहीं सकते आखिर दुनियां भर में दादाजी का नाम सम्मान से जो लिया जाता है! दुनियाँ जहान में अपना सम्मान बनाए रखने दादाजी का सम्मान करते दिखना भी तो जरूरी है! दादाजी जी का जाने ऐसा जाने कितना सम्मान है कि चाचू के भतीजों के सालों-साल, दिनरात गरियाने के आंदोलनों पर आंदोलन चलाने के बाद भी दादाजी का सम्मान है कि घटने की जगह बढ़ता ही चला जाता है!
हमारी मूल भारतीय संस्कृति में तो चाचा, ताऊ, पिता सबकी बड़ी इज्ज़त होती थी•••• जिनकी चाचा, ताऊ इज्जत करते थे वे तो देवतुल्य होते थे ! और आज•••
चाचा-ताऊ जिनके कदमों में बिछे जाते हैं , भतीजे उन्हें खूब
लतियाते जाते हैं! और
चाचा- ताऊ भीष्म पितामह से
कुछ कह भी नहीं पाते हैं!
देश में चलन, अनोखा चल निकला है!
देश बदल कर अब “बदला-बदला” है!

  • सत्यार्चन
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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

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