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मेरा देश बदल रहा है? 

मेरा देश बदल रहा है? 

विगत वर्षों में, सोशल मीडिया पर अर्धसत्य युक्त अफवाहों से हंगामा फैलाकर, दुनियाँ के 6 बड़े देशों में युगों से सत्ता पाने  को संघर्षरत कट्टरपंथी ताकतों ने सत्तासीन होने में सफलता  पा ली! 

 कुछ देशों के नव सत्ताधीश,  सत्तासीन होने के बाद भी इस अर्धसत्य आधारित अफवाह तंत्र रूपी शस्त्र का मोह त्याग नहीं सके!

 जबकि सत्तासीन होते ही यह शस्त्र आत्मघाती हो चुका था!

सोशल मीडिया की इस छुपी हुई घातक शक्ति का आपराधिक मनोवृत्ति के लोगों ने सदा की भाँति दुरुपयोग करना शुरू कर दिया! पिछले कुछ ही वर्षों में कितने ही लोगों की हत्या भीड़ द्वारा कराई जा चुकी है और ऐसी हत्या की घटनाओं में वर्ष प्रति वर्ष तीव्र वृद्धि होते जा रही है! 

अफवाह तंत्र की महाघातक आत्मघआत्मघाती  क्षमता का अनुमान लगाने में जाने क्यों शासन-प्रशासन उदासीन है! भारतीय सामाजिक वृत्ति के इस वीभत्स पतन की किसी को कोई चिंता होती नहीं दिखती! ऐसा ही उदासीन प्रतिरोध चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब शासन-प्रशासन के हाथ करने के लिए कुछ शेष नहीं रह जायेगा! जिसकी लाठी उसकी भैंस से भी बदतर पूर्ण अराजकता का साम्राज्य होगा! 

इस निष्कर्ष तक पहुँचने का कारण विभिन्न राज्यों में बच्चा चोर,  गौ चोर, दवा चोर, मोबाइल चोर, मुर्गी चोर, रोटी चोर जैसे आरोपों में भीड़ द्वारा मारे गए लोगों में से अधिकांश निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भी अफवाहों पर रोक लगवाने किये गये प्रयासों से कई गुनी अधिक सक्रियता विरोधियों को बदनाम करने में  दिख रही है! 

अंधेरा सबल हुआ है! 

उल्टी दिशा में चल रहा है!

 मेरा देश बदल रहा है!

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