Menu

मेरी इकलौती गजल 

मेरी इकलौती गजल 
तुझको नजर कर

लिखना चाहूँ 

 क्या लिख पाऊं

कोई गजल!

सर से लेकर

पैर तलक तू

 खुद ही ठहरी 

शोख गजल!

🔽

तेरे गेसू गजल,

तेरे नैन गजल,

लब हैं गजल,

रुखसार गजल!

🔼
🔽

तेरी तिरछी एक चितवन का 

हो जाये जो,

  दीदार गजल!

🔼
🔽

तेरा सीना गजल,

 है नाफ गजल,

कमनीय कमर की

लचक गजल,

🔼
🔽

ढाये गजब

दूर जाये गजल,

आये कयामत

जो आये गजल! 

🔼
🔽

जान जाये निकल•••

 जो रूठ जाये गजल!

जन्नत जाये मिल•••

जब रस पिलाये गजल!

🔼
🔽

 हदेइंतजार ना पूछ

मिलन के लिये

ले लेंगे जनम

हजार गजल!

🔼
🔽

बंदगी से खुश हो

बोले ‘वो’ माँग!

 माँगते क्या और•••

माँग लाये गजल!
🅾
-सत्यार्चन

Advertisements

2 thoughts on “मेरी इकलौती गजल ”

    1. धन्यवाद आपका!
      आगे भी आवागमन बनाये रखियेगा!

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...

%d bloggers like this: