आइये भारत को समृद्ध करें!….

अपने सपनों के भारत की र चलें …. बिना कुछ खोये बस चंद पल दीचिये ….

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साहित्य समृद्ध हुआ तो राष्ट्र समृद्ध होगा ! यदि कर्तव्य निर्वहन का श्रीगणेश करना है तो …. अनुरोध है कि….
प्रेषित में से सर्वश्रेष्ठ रचनाकार को मासिक, मासिक, त्रैमासिक व वार्षिक सम्मान-निधि व प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जायेगा!  (विस्तृत विवरण केवल प्रेषक के मेल पर भेजा जायेगा!)  इससे हमारे माध्यम से आपको बिना कुछ भी खोये , निःशुल्क प्रकाशन व प्रोमोशन सहित प्रतिष्ठा लाभ भी  प्राप्त होगा !!! ….

विचार करें ….  आपको हमको सब हिन्दी जनों को सोचना है… तय हमें करना है कि हम अलग-अलग प्रयासों को मरते देखना चाहते हैं…,  जिसमें किसी को किसी लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होनी है …., या एक दूसरे का हाथ पकड़ साथ चलकर,  हिन्दी को और हिन्दुस्तानी भाषाओं को सशक्त करने में योगदान करना है!….

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अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...