मैं , तुम , हम!

मैं , तुम , हम!

शीशों का छिटकना•••
टूटना!
बिखरना!
किरचों का चुभना!
बस तुम्हारे साथ ही होता है क्या?
मेरा हाल क्या है ?
कुछ पता भी है ?
.
तुम कहो मैं जीता !
मैं कहूँ तुम!
जीत क्यों?
हार क्यों?
पनप सका ना
अब तक वो प्यार क्यों?
गले लगा लेते जब जीतते
लग जाते गले हारकर !
मैं क्यों ?
तुम क्यों?
होना हम दुश्वार क्यों???
.
-सत्यार्चन

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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