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मैं , तुम , हम!

मैं , तुम , हम!

शीशों का छिटकना•••
टूटना!
बिखरना!
किरचों का चुभना!
बस तुम्हारे साथ ही होता है क्या?
मेरा हाल क्या है ?
कुछ पता भी है ?
.
तुम कहो मैं जीता !
मैं कहूँ तुम!
जीत क्यों?
हार क्यों?
पनप सका ना
अब तक वो प्यार क्यों?
गले लगा लेते जब जीतते
लग जाते गले हारकर !
मैं क्यों ?
तुम क्यों?
होना हम दुश्वार क्यों???
.
-सत्यार्चन

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