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यही सच है!

 

यही सच है!
कई बार जो पीछे छूट जाता है, हाथ से छिटक जाता है, गिर जाता है , टूट जाता है •••
अधिकतर उसका केवल उजला पक्ष याद आता है••• मगर यह तो दर्द बढ़ाता है••••
किन्तु कुछ के लिये वही महत्वहीन हो जाता है क्योंकि वे उस हाथसे छिटक कर गिरे की अच्छाई, छूटने के बाद नकारने लगते हैंं! कमियों को याद करते हैं या ढूढ़कर कमियाँ निकालते है••• अपने जेहन में दोहराते हैं और बेशकीमती भी था तो उसे  महत्वहीन बना डालते हैं ! तब वह छिटकना , छूटना साधारण लगने लगता है••• और  अथिक अच्छा कुछ आगे मिलने की आस जागती है•••• अधिकतर लोगों को मिल भी जाता है! यही मेरे साथ भी है !
जो अच्छाई दर्द ना देकर खुशी का वायस हो वह आज हो या ना हो •••• उसे कभी बुरा नहीं कहना, बुरा नहीं सोचना ••••
यही इंसानियत है! धर्म भी यही है!
दुनियाँ में उस अनाम / सर्वशक्तिमान / सर्वोपरि को छोड़कर कुछ भी ऐसा नहीं जो केवल अच्छा या केवल बुरा हो , चाहे वो इंसान हो जगह हो या सामान हो!
#सत्यार्चन

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अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...

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