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रिश्ते! Relationships !

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रिश्ते! Relationships !

रिश्ते आपकी परछाईं या प्रतिबिम्ब की तरह हैं…

Relationships are alike your shadows or mirror images…

आपके प्रतिबिम्ब का सौंदर्य आपकी स्थिति पर निर्भर है

आपके रिश्तों का भी…!

Your mirror image looks as you are…

Similarly your relationships do …

 जितने आप सुदृढ़ होंगे उतना आपका प्रतिबिम्ब होगा…

आपके रिश्ते भी…!

As Stronger you are as your images …

Similarly your relationships do…

यदि आपका रुख ऊगते सूर्य की ओर है/ रोशनी की ओर है तो आपकी परछाईं आपका पीछा कर रही होगी…

और यदि आपकी गति सूर्य/ रोशनी की विपरीत दिशा में है तो आप परछाईं का पीछा कर रहे होंगे…

किन्तु यदि आप सूर्य़/ रोशनी से दूर अंधेरे में हैं तो परछाईं कहीं नजर नहीं आयेगी….।

आपके रिश्ते भी….

@सत्य+अर्चन

If you are moving towards Sun / lights your shadow would follow you….

If you you are moving opposit to Sun / lights you would be following your shadows …

If you are away of Sun / lights,  (in dark) you won’t find any shadow of yours …

Similarly your relationships do …

@sathyarchan

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4 thoughts on “रिश्ते! Relationships !”

  1. Madhusudan कहते हैं:

    Waah……bahut satyata se rishton ko darshaayaa…..

    1. धन्यवाद मधुसूदन जी … बहुत नियमित हैं आप … कभी चूकते नहीं…

      1. Madhusudan कहते हैं:

        haa ek ghanta lagbhag samay wordpress par byatit kar lete hain…..jinki rachnaaye pasand aati hai padhne se nahi chukte …kyonki padhne se hi likhne ke raaste khulte hain. sukriya

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...

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