रोशन हुए चिराग

रोशन हुए चिराग

फिर से महफिल में

रूठकर जाने वाले

लॊट जो आये हॆं!

.

कब तक कोई सुनाये

अशआर

दिल-ए-खूं से

जाने

कोई

कतरा

कभी

छूकर भी गुजरा कि  नहीं ….

.

खुदबखुद खुश होते

ओढ़ लेते खुशफहमी

खुद ही रूठते खुद से

खुद खुद को मनाते हॆं …

बेवजह, बेमकसद यूं ही

बेकार जिये जाते हॆं!

.

ख्वाबों में ही सजती हॆ

खुद ख्वाबों की ही महफिल

ख्वाबों के कलाम खुद

ख्वाब पढ़ा करते हॆं

ख्वाब रुठ, लेते रुखसत

ख्वाब लॊट, फिर आते

ख्वाबों से ही महफिल  रोशन

ख्वाब ही अंधेरे हॆं!

इश्क अजब असर तेरा

तुझसे शाम, रात फिर सबेरे हॆं

#सत्यार्चन

23.194310577.4391808
Advertisements

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“रोशन हुए चिराग” पर एक विचार

आपके आगमन का स्वागत है... जाने से पहले अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...!!!