लाइफस्टाइल सुधारें !स्वस्थ रहें!!

बंदर कभी बीमार नहीं होता

क्यों नहीं होता बीमार ?

शोधकर्ताओं ने विभिन्न बीमारियों के जीवाणु बंदर के शरीर में डालकर देखें लेकिन बंदर फिर भी ठीक!

शोधकर्ताओं में से एक का मानना है कि बंदर भी चिड़ियों की तरह ही सुबह सुबह, सोकर उठते से खाना खाना शुरू कर देता है यह बड़ा कारण है उसके स्वास्थ्य का !

किन्तु मुझे लगता है कि

शोधकर्ताओं ने 2-3 तथ्यों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया…
जैसे – बंदर, खरगोश और चिड़ियां आदि जीव-जंतु जन्म से मृत्यु तक रोज सोकर उठने से  लेकर रात को फिर सोने तक पूरी तरह प्राकृतिक जीवन जीते हैं… प्रकृति के अनुरूप वे स्वयं को ढाल लेते हैं जबकि हम मानव; प्रकृति को अपने अनुरूप बनाने का मूर्खता करते आए हैं…!

बंदर आजीवन सजग व सक्रिय रहते हैं… बंदर, मछलियां और चिड़ियां सर्वाधिक सक्रिय रहने के कारण बाहरी /मानवीय हस्तक्षेप या बड़े जीवों का भोजन ना बनें तो, अकाल मृत्यु और बीमारी से सुरक्षित रहते हैं… बंदर सर्वाधिक मानव समान, सर्वाधिक प्राकृतिक आहार बिहार के साथ साथ सर्वाधिक सक्रिय रहने वाला बंदर सबसे अधिक प्रतिरोधक क्षमता से युक्त है..! क्यों है?

उसी तरह के इंसान जो प्रकृति के सर्वाधिक अनुरूप जीते हैं यथा सूर्योदय से पहले उठने वाले, सूर्यास्त के थोड़े ही बाद सोने वाले, क्या क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए पर ना विचारने वाले मजदूर (शारीरिक सक्रियता से युक्त इंसानों) को देखिए वे और उनके परिजन ही सर्वाधिक स्वस्थ भी पाये जाते हैं…. !
इसीलिए बिना दवाओं या बिना परहेज के स्वस्थ और सबल रहना है तो अपनी लाइफ स्टाइल प्रकृति के अनुरूप बनाने की दिशा में आज ही बढ़ना शुरू कीजिए! आहार में अधिक से अधिक चीजें प्राकृतिक स्वरूप में लेना शुरू कीजिए… हर मौसम की हर प्रकार की सलाद, सब्जियां और फल खाने की कोशिश कीजिए!
स्वस्थ रहिए !
मस्त रहिए!!

लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

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