Menu

वर्तमान आरक्षण व्यवस्था सरकारी मोटराइज्ड व्हीलचेयर है!

वर्तमान आरक्षण व्यवस्था सरकारी मोटराइज्ड व्हीलचेयर है!

आरक्षण समर्थक और विरोधी दोनों ही मेरा समर्थन चाहते हैं•••

किन्तु क्षमा कीजिए! इंसान को इंसान से लड़ाकर, समाज को बाँटने और राष्ट्र को कमजोर करने के अथवा मानवता के विरुद्ध किसी भी आंदोलन का समर्थन ना मैंने कभी किया है ना कभी करूँगा!

जहाँ तक आरक्षण का प्रश्न है वह मुझे, मेरे या बच्चों के लिये नहीं चाहिए ना ही हम जैसों के लिए बाबा साहेब ने प्रस्तावित किया था!

बाबा साहेब ने यह प्रस्ताव जिनके लिये, जिस अपेक्षा के साथ किया था आरक्षण के लाभार्थियों ने ठीक उसके विपरीत अपने ही वंचित जाति भाइयों को उसका उपयोग करने देने की जगह स्वयं संपन्न से और संपन्न होने में इसका दुरुपयोग किया और आज भी करते आ रहे हैं!

*1950-60,आरक्षण लागू होने के पहले 10 वर्ष में समय, स्वाभाविक रूप से, *पहली बार के आरक्षण लाभार्थी 100% थे! तब आरक्षण की सम्पूर्ण प्रमाणित उपयोगिता निकाली गई !

1960-70 में भी लगभग यही स्थिति रही!

किन्तु

*आज 68 वर्ष बीतते-बीतते, पहली अनुसूचि में शामिल आरक्षितों में से, अब पहली बार आरक्षण का लाभ लेने वाले 1% से भी कम बचे हैं ! जिससे स्पष्ट है कि अब आरक्षण लाभ का 99%, आरक्षित जातियों के सुविधा संपन्न तबके द्वारा, अपने ही जाति भाइयों का हक छलकर, विलासिता के साधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है!

इसका विकल्प तलाशा जाना चाहिए!

आरक्षित जातियों के सक्षम वर्ग को भी अपने ही वंचित व विपन्न जाति भाइयों के उन्नयन में योगदान हेतु स्वेच्छा से आरक्षण लाभ त्यागकर बाबासाहेब के सपने को साकार करने में सहयोगी होना चाहिये!

चूँकि मैं स्वयं को सक्षम मानता हूँ, अतः मैंने तो सभी तरह की सब्सिडी तक छोड़ रखी हैं!

मुझे लगता है कि शासन, पिछड़ी जातियों के उन्नयन का कोई ऐसा युक्तियुक्त पूर्ण कार्यक्रम बनाये, जिससे वह अर्ध-सक्षम ही ना रहे!

वर्तमान व्यवस्था में; चलने में कमजोर आरक्षितों को मोटराइज्ड व्हीलचेयर पर बिठाकर नैसर्गिक सक्षम लोगों के साथ चलाने, बढ़ाने, दौड़ाने जैसा मूर्खता पूर्ण व आभासी प्रयास किया जा रहा है!

आवश्यकता अर्ध-सक्षम को, नैसर्गिक सामान्य जैसा सक्षम बनाने हेतु, उनकी संतुलित पोषण व्यवस्था सहित, उनसे सही एक्सरसाइज़ आदि कराकर, उनके उचित उपचार की है!

“सरकारी व्हीलचेयर रूपी आरक्षण”

की

“निरंतर उपलब्धता”

“वास्तविक उन्नयन”

का विकल्प नहीं है

ना ही हो सकता है!!!

-सत्यार्चन

Advertisements
टैग्स: , , ,

अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...

%d bloggers like this:
टूलबार पर जाएं