विदाई

– विदाई – .
किसी के गले से लगना था
गले से किसी को लगाना था
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ना कोई गले से लग सका
ना गले से कोई लगा सका…
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किसी के दिल में बसना था
किसी को बसाना था दिल में;
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ना कोई दिल में बस सका
ना बसा सका कोई दिल में …
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आखिर विदाई की घड़ी आई..
और हो गई उसकी विदाई!
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#सत्यार्चन

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लेखक: सत्यार्चन.SathyaArchan

हिन्द-हिन्दी-हिन्दू-हित-हेतु..... वास्तविक हिन्द हितचिंतक मंच!. प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते... हो भी नहीं सकते !!! - #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan

“विदाई” पर 2 विचार

  1. वाह बहुत ही अच्छा लिखा है सर आपने
    दाद स्वीकार करें

    1. सुबुद्ध.SathyaArchan – भारत – प्रयास और परिवर्तन के प्रबल पक्षधर पराजित नहीं होते...हो भी नहीं सकते !!! -हिन्द- हिन्दू - हिन्दी का वास्तविक हितचिंतक मंच!- #सत्यार्चन #SathyArchan #Satyarchan
      सत्यार्चन.SathyArchan कहते हैं:

      धन्यवाद् …. आपका!

आपके आगमन का स्वागत है... जाने से पहले अच्छा-बुरा... कुछ तो कहिये...!!!